Haraam Khor Ko Dhundh Rahi Hai

Haraam Khor Ko Dhundh Rahi Hai

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आँखे आज भी उस हरामखोर को ढूंढ रही है
जिसने बचपन में यह अफवाह फेलाई थी...
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"मोर का पंख किताब में रखने से विद्दाआती है

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